Hindi – Andreas Klamm Sabaot

Hindi – Andreas Klamm Sabaot

एंड्रियास Klamm Sabaot के रूप में एंड्रियास Klamm और एंड्रियास Klamm Sabaot रूप में जाना जाता जर्मनी में बर्लिन Rhein के शहर में 6 फरवरी को, 1968 का जन्म होता है हूँ। उन्होंने कहा कि एक ट्यूनीशियाई-फ्रांसीसी तथा जर्मनी के परिवार के एक वंशज है। 1984 के बाद से एंड्रियास Klamm Sabaot एक पत्रकार, रिपोर्टर, संवाददाता, टीवी निर्माता, रेडियो निर्माता, मीडिया निर्माता, कलाकार, रेडियो टीवी आईबीएस लिबर्टी स्थानीय जनता टीवी पर और के लिए मेजबान और प्रस्तोता जो 1986 में स्थापित किया गया है के रूप में काम कर रहा है वह के लेखक 11 किताबें। उन्होंने लिखा है और अंग्रेजी और जर्मन भाषा में अपनी पुस्तकों में प्रकाशित किया। एंड्रियास Klamm Sabaot पहला टीवी शो और रेडियो कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया, जब वह जर्मनी में स्थानीय केबल टीवी पर उम्र के 16 साल थी।

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एंड्रियास Klamm Sabaot तीन गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार बन गए। 1998 के बाद से वह अक्षम है और उनके स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि एक पहिया कुर्सी में अपने संगीत पैदा करता है। उन्होंने कुंजीपटल खेलने के लिए सक्षम है और कीबोर्ड के रूप में सक्रिय है।

रेडियो आईबीएस टीवी स्वतंत्रता के लिए वह 1986 1000 टीवी प्रोग्राम्स और 1000 रेडियो कार्यक्रम के बाद से उत्पादन किया गया है। अपने टीवी प्रोडक्शंस और रेडियो प्रोडक्शंस एंड्रियास Klamm Sabaot में से कुछ अपने आप ट्यूब चैनल पर प्रस्तुत करता है (http://www.youtube.com/andreasklamm)।

कलाकार जर्मनी में और यूनाइटेड किंगडम में कुछ कंपनियों की स्थापना की है और यूनाइटेड किंगडम में और जर्मनी में दोनों काम कर रहा है। उन्होंने यह भी संस्थापक, प्रबंध निदेशक और इस तरह ब्रिटिश Newsflash पत्रिका, रेडियो टीवी आईबीएस लिबर्टी, आईबीएस टीवी लिबर्टी, आईबीएस स्वतंत्र प्रसारण सेवा स्वतंत्रता, स्वतंत्रता और शांति के रूप में अब 12 गैर लाभ संगठनों, के मुख्य संपादक है! मानवाधिकार रिपोर्टर, ISMOT अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक और चिकित्सा आउटरीच टीम, irsc ग्लोबल इंटरनेशनल शरणार्थी समर्थन समुदाय, bragersonet ब्राजील जर्मन एकता नेटवर्क और अन्य संघों

जनवरी 2016 में उन्होंने संगीतकार, संगीत निर्माता, गायक, गीत लेखक और संगीतकार के रूप में अपने कैरियर के अतिरिक्त शुरू किया है। फ़रवरी 2016 in वह 24 एकल और तीन संगीत एलबम जारी किया है। उन्होंने संगीतकार, गीतकार, गायक, लेखक, संगीत निर्माता, संगीत वीडियो अपने संगीत प्रस्तुतियों के निर्माता है। अधिक जानकारी www.andreasklammsabaot.com पर उपलब्ध हैं।

अपने संगीत प्रस्तुतियों की शैली वैकल्पिक, इलेक्ट्रॉनिक, पॉप, आर एंड एन, रॉक, वैकल्पिक रॉक, जैज और शास्त्रीय संगीत हैं।

एंड्रियास Klamm Sabaot की संगीत प्रस्तुतियों के लिए मुख्य आदर्श वाक्य में कहा जाता है „सीमाओं के बिना संगीत का आनंद और जश्न मनाने के लिए“।

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Greek – Andreas Klamm Sabaot

Greek – Andreas Klamm Sabaot

Ανδρέας Klamm Sabaot όπως είναι γνωστή ως Ανδρέας Klamm και Ανδρέας Klamm Sabaot γεννήθηκε στις 6 του Φεβρουαρίου 1968 στην πόλη του Ludwigshafen am Rhein στη Γερμανία. Είναι απόγονος μιας οικογένειας Τυνησίας-γαλλική και τη Γερμανία. Από το 1984 ο Ανδρέας Klamm Sabaot εργάζεται ως δημοσιογράφος, ρεπόρτερ, ανταποκριτής, τηλεοπτικός παραγωγός, ραδιοφωνικός παραγωγός, Media Παραγωγός, καλλιτέχνης, υποδοχής και παρουσιαστής σε τοπικό Δημόσια Τηλεόραση και Ραδιοφωνία Τηλεόραση IBS Liberty η οποία ιδρύθηκε το 1986. Είναι συγγραφέας του 11 βιβλία. Έγραψε και δημοσίευσε τα βιβλία του στην αγγλική και γερμανική γλώσσα. Ανδρέας Klamm Sabaot παρουσίασε τα πρώτα τηλεοπτικές εκπομπές και ραδιοφωνικά προγράμματα, όταν ήταν 16 ετών στην τοπική συνδρομητική τηλεόραση στη Γερμανία.

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Ανδρέας Klamm Sabaot έγινε θύμα των τριών σοβαρών ατυχημάτων. Από το 1998 είναι απενεργοποιημένη και τις συνθήκες υγείας του είναι σοβαρή. Ο ίδιος παράγει τη μουσική του σε μια καρέκλα τροχό. Είναι σε θέση να παίξει το πληκτρολόγιο και δραστηριοποιείται ως κιμπορντίστας.

Για Radio IBS τηλεόραση Liberty που έχει παραχθεί από το 1986 1000 τηλεοπτικά προγράμματα και 1000 Προγράμματα Ραδιόφωνο. Μερικά από Τηλεοπτικές Παραγωγές του και ραδιοφωνικές παραγωγές Ανδρέας Klamm Sabaot παρουσιάζει στο You Tube του καναλιού (http://www.youtube.com/andreasklamm).

Ο καλλιτέχνης έχει ιδρύσει ορισμένες εταιρείες στη Γερμανία και στο Ηνωμένο Βασίλειο και εργάζεται τόσο στο Ηνωμένο Βασίλειο και στη Γερμανία. Είναι επίσης ο ιδρυτής, διευθυντής και αρχισυντάκτης των 12 μη κερδοσκοπικούς οργανισμούς, όπως η British ΜΑΤΙΑ Magazine, Ραδιόφωνο Τηλεόραση IBS Liberty, IBS τηλεόραση Liberty, IBS Ανεξάρτητη Υπηρεσία εκπομπής Ελευθερίας, Ελευθερία και Ειρήνη Τώρα! Ανθρώπινα Δικαιώματα Δημοσιογράφοι, ISMOT Διεθνή Κοινωνική και Ιατρική Ομάδα Κοινωνικής, IRSC παγκόσμια Διεθνή Κοινότητα Υποστήριξης Προσφύγων, bragersonet Βραζιλίας Γερμανικά Δίκτυο Αλληλεγγύης και άλλες ενώσεις

Σε Ιανουάριο 2016 έχει ξεκινήσει επιπλέον την καριέρα του ως μουσικός, μουσικός παραγωγός, τραγουδιστής, στιχουργός και συνθέτης. Στο Φεβρουάριο του 2016 έχει κυκλοφορήσει 24 singles και τρία άλμπουμ μουσικής. Αυτός είναι ο συνθέτης, στιχουργός, τραγουδιστής, συγγραφέας, μουσικός παραγωγός, μουσικός παραγωγός βίντεο από μουσικές παραγωγές του. Περισσότερες πληροφορίες είναι διαθέσιμες στην www.andreasklammsabaot.com.

Το είδος της μουσικής παραγωγές του είναι Alternative, Ηλεκτρονική, Pop, R & N, Rock, Alternative Rock, Jazz και κλασική μουσική.

Το κύριο σύνθημα για τις μουσικές παραγωγές του Ανδρέα Klamm Sabaot ονομάζεται «Μουσική χωρίς σύνορα για να απολαύσετε και να γιορτάσουμε“.

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XXL-info. Pflege und Soziales: Hartz 4 und Frauen in Deutschland, Teil 1

XXL-info. Pflege und Soziales: Hartz 4 und Frauen in Deutschland, Teil 1

Hannover. 30. April 2011. (and). Frauen streiten sich an einer Mülltonne um etwas Abfall-Obst in Hannover und Rentner in schwerster Armut kämpfen in Deutschland um das Überleben. Eine ausreichende medizinische Versorgung gibt es für arme Menschen in Deutschland nicht mehr. Die Schweizer sehen in Deutschland das „China von Europa“. Das ist bereits die Gegenwart. Wie mag die Zukunft in Deutschland aussehen ?

In der Sendung XXL-info. Pflege und Soziales, Hartz 4 und Frauen in Deutschland werden viele Fragen gestellt und eine engagierte Frau, Beate gibt die Antworten in einem Telefon-Interview.

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=jqqf4rZQ5NY&w=425&h=349]

Hartz 4 und Frauen in Deutschland, Teil 1. Beate aus Hannover ist eine der ersten Maurer-Gesellinnen nach dem Ende des Zweiten Weltkrieg in Deutschland. Die Frau studierte, arbeitete in mehreren Berufszweigen in Deutschland und in Europa und versucht dem Gefängnis oder der Falle aus Hartz 4 in Deutschland zu entkommen. Beate fühlt sich als Frau in Deutschland diskriminiert und entmündigt. Telefon-Interview, XXL-info. Pflege & Soziales, Produktion: Andreas Klamm, Journalist, Radio TV IBS Liberty, Musik Wolfgang Leng, Titel „Radio IBS Liberty“, Länge der Sendung / Produktion, 52,22 min, CC 2011, Creative Commons, http://www.radiotvinfo.org, http://www.ibstelevision.org

Link zur Produktion: http://www.youtube.com/watch?v=jqqf4rZQ5NY

Traumhochzeit in London

Traumhochzeit in London

London. 29. April 2011. In London (and). haben sich am Freitag um 12.16 Uhr Prinz William und seine Verlobte Kate Middleton das „Ja-„Wort gegeben. Die Trauungs-Zeremonie wurde in der Westminster Abbey in London gehalten. Bis zu zwei Milliarden Menschen in der Welt sahen und hörten die Übertragungen der Hochzeits-Feier in Fernseh- und Radio-Programmen.

Die jetzt neue Prinzessin Kate trug in ihrem langen und offenen Haar ein Cartier Diadem aus dem Jahr 1936. Die Queen hat das Diadem als Leihgabe für den schönsten Tag des jung vermählten Paares zur Verfügung gegeben.
Prinz William nahm Kate mit den Worten: „“Mit diesem Ring nehme ich dich zur Frau; mit meinem Körper ehre ich dich; und teile all meinen weltlichen Besitz mit dir; im Namen des Vaters und des Sohnes und des Heiligen Geistes. Amen“ zur Frau.

Der frisch verheiratete Prinz trug zur Hochzeitsfeier eine rote Parade-Uniform der Irish Guard mit einer himmelsblauen Schärpe. Bis zu 1900 Gäste wurden in die Westminister Abbey zur Hochzeitsfeier geladen.

Nach der Trauung in der Kirche fuhr das frisch vermählte Ehepaar in einer offenen Kutsche über die Prachstrasse „The Mall“ zum Buckingham Palace. Die Redaktion wünscht dem jung verheirateten Könglichen Ehepaar für die Zukunft nur das Beste.

Fernseh-Produktion: Andreas Klamm, Journalist, Radio TV IBS Liberty, www.radiotvinfo.org, 3mnews.org, Nachrichten-Agentur, www.3mnews.org

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=zXLv2krSPhk&w=425&h=349]

Link zur Produktion, http://www.youtube.com/watch?v=zXLv2krSPhk

Opfer der Gewalt – Ein Mann sucht verzweifelt Hilfe

Opfer der Gewalt – Ein Mann sucht verzweifelt Hilfe

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=bFxHwsGQqXk&w=480&h=390]

Länge der Sendung: 32.09 min / sec, Radio TV IBS Liberty

Stefan Maier ( * Name aus Sicherheitsgründen von der Redaktion geändert !) aus Gütersloh wurde vor 12 Jahren Opfer einer schweren Gewalt-Tat und Straftat. Heute sucht der Mann verzweifelt Hilfe. Stefan frägt im Interview bei Radio TV IBS Liberty verzweifelt: „Wer hilft mir ?“ Stefan Maier aus Gütersloh hofft, dass ihm mit einer Transplantation in China geholfen werden kann. Dafür sucht er Ärzte, Journalisten, die ihn nach China begleiten, Sponsoren und ein Kamera-Team eines Fernseh-Senders, die seine Geschichte des Leides und der Hilfe für eine Fernseh-Produktion dokumentieren. Stefan Maier ist via Mobil-Telefon 0176 36 106942 persönlich erreichbar.

Interview bei Radio TV IBS Liberty, http://youtu.be/bFxHwsGQqXk

Weitere und ausführliche Informationen zu den Radio – und Fernseh-Programmen von Radio TV IBS Liberty können Sie im Internet bei www.radiotvinfo.org oder www.ibstelevision.org finden. Die Sendungen von Radio TV IBS Liberty werden mit einer CC Creative Commons Lizenz veröffentlicht und dürfen bei Nennung der Quelle Radio TV IBS Liberty unverändert gesendet, weiter verbreitet und weiter veröffentlicht werden.

Atomkraftwerke abschalten – aber warum ?

Atomkraftwerke abschalten – aber warum ?

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=E61IEh_IM44&w=480&h=390]

Eine Telefon-Mitmach-Aktion von Radio TV IBS Liberty. Ihre Meinung und Stimme im Radio via Telefon-Interview und Statement bei Tel. 06236 48 90 44. Anrufe sind rund um die Uhr von 26. April 2011 bis 26. Mai 2011 möglich. Sind Sie für Atomkraft oder für Atomaustieg ? Ihre Meinung bitte. Eine Produktion von Andreas Klamm, Journalist bei Radio TV IBS Liberty, http://www.radiotvinfo.org, http://www.ibstelevision.org

Link, http://youtu.be/E61IEh_IM44

Deutschland, Land der Wunder, Teil 1

Deutschland, Land der Wunder, Teil 1

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=O5EeEmSX6aM&w=480&h=390]

Eine Mitmach-Aktion von Radio TV IBS Liberty. Rufen Sie an Telefon 06236 48 90 44 und erzählen Sie dem französisch-deutschen Journalist, Andreas Klamm – Sabaot, warum Deutschland das Land der Wunder ist — oder auch nicht ?, Tel. 06236 48 90 44, Deutschland, http://www.radiotvinfo.org, http://www.ibstelevision.org. Die Aktion beginnt am 26. April 2011 bis 26. Mai 2011 – Anrufe bei Radio TV IBS Liberty sind rund um die Uhr möglich.

Link, http://youtu.be/O5EeEmSX6aM

Buch-Tour von und mit Andreas Klamm-Sabaot

Buch-Tour von und mit Andreas Klamm-Sabaot

[youtube=http://www.youtube.com/watch?v=-BTvsJgMxl4&fs=1&hl=en_US]

Hinweise zu den 9 veröffentlichten Büchern von Andreas Klamm-Sabaot und zur Buch-Tour im Dezember 2010 und im Frühjahr 2011. Ausführliche Informationen zu den Büchern des französisch-deutschen Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor und Schriftsteller, Andreas Klamm-Sabaot sind bei http://www.radiotvinfo.org/andreasklamm zu finden.

„Wetten, dass…?“ Der Zustand von Samuel ist weiterhin kritisch

„Wetten, dass…?“ Der Zustand von Samuel ist weiterhin kritisch

Schwerer Unfall live vor Millionen vor Zuschauern – Student wurde in einer Not-Operation versorgt – Kanadischer Jugend-Star Justin Bieber bittet um Gebete für Samuel Koch und dessen Familie – Große internationale Anteilnahme in Deutschland und in der Welt

Von Andreas Klamm-Sabaot

Düsseldorf. 6. Dezember 2010. Der Zustand des 23jährigen Schauspiel-Studenten Samuel Koch aus Baden-Württemberg, der am Samstagabend bei der Familien-Unterhaltungs-Show „Wetten, dass…?“ während der Live-Sendung des ZDF bei einer Wette vor Millionen vor Zuschauern verunglückte ist weiterhin kritisch, teilten die Ärzte des Universitäts-Klinikums in Düsseldorf mit. Bereits am Sonntag, rund 13.5 Stunden nach dem der Student bei einer artitstischen Wette im Studio augenscheinlich schwer stürzte und sich bei dem Sturz schwer verletzte wurde, der der junge Student in einer Not-Operation im Universitäts-Klinikum Düsseldorf versorgt. Bei der Not-Operation, die rund 2,5 Stunden dauerte, wurden mehrere Knochenbrüche an der Halswirbeläule und die Blutversorgung im Bereich der Halswirbelsäule des Studenten stabilisiert. Samuel wurde in ein künstliches Koma versetzt und wird nach Informationen der Ärzte für eine längere Zeit in einem Zustand des künstlichen Komas verbleiben. Der Student habe einen ausgeprägten Lebenswillen gezeigt. Zu möglicherweise bleibenden Schäden konnten sich die Ärzte nicht äußern, da im künstlichen Koma nicht alle neurologischen Untersuchungen möglich seien.

Bereits am Samstagabbend stellten die Ärzte teilweise Lähmungserscheinungen fest. Diese hätten in der Nacht leicht abgenommen und seien am Sonntagmorgen erneut in stärkerer Ausprägung aufgetreten. Nach dem der Allgemeinzustand des Studenten stabilisiert werden konnte, wurde eine Not-Operation zur Entlastung der verletzten Halswirbelsäule des jungen Mannes durchgeführt. Die Ärzte konnten neben mehreren Knochenbrüchen an der Halswirbelsäule auch eine Schädigung des Rückmarks diagnostizieren. Ob und wie weit diese Schäden zu einer bleibenden Behinderung, etwa einer Tetraplegie führen könnten, konnten die Ärzte am Sonntag bei einer Pressekonferenz im Universitätsklinikum nicht sagen.

Nachdem in der Folge des Sturzes der junge Student offensichtlich erkennbar für eine kurze Zeit bewusstlos war, wurde am Samstagabend vom ZDF und dem Entertainer Thomas Gottschalk, die 192. Ausgabe der beliebten Familien-Unterhaltungs-Show „Wetten, dass…?“ erstmals in der 29jährigen Geschichte der Unterhaltungs-Sendung abgebrochen. Der Fernseh-Sender ZDF und Thomas Gottschalk erhielten aus unterschiedlichen Reihen viel Lob für den soveränen Umgang mit der Situation nach dem schweren Unfall von Samuel. Die neue SPD-Ministerpräsidentin des Landes Nordrhein-Westfalen, Hannelore Kraft, wurde zu einer Zeugin des Unfall-Geschehen. Die Ministerüräsidentin war als Gast in der ZDF-Unterhaltungs-Sendung in Düsseldorf im Studio anwesend.

„Wetten, dass….?“ wird fortgesetzt

Die ZDF-Unterhaltungs-Show „Wetten, dass…?“ wird auch künftig fortgesetzt. Das sagte der ZDF-Programmdirektor Thomas Bellut in einem Interview mit NDR 1 Niedersachsen. Die Spiele-Show „Wetten, dass?“ werde sicherlich weiter laufen. Nach dem schweren Unfall am vergangenen Sonnabend werde das ZDF aber entsprechende Konsequenzen ziehen: Die Ergebnisse der Unfall-Untersuchung würden dazu genutzt, die Regeln so zu verändern, dass sich ein solcher Vorfall nicht wiederholen könne.

Der Kandidat Samuel Koch aus Hannover sei ein erfahrener Stuntman. Die Redaktion habe im Vorfeld nicht erkennen können, dass es zu solch einem Unfall kommen werde, da auch die Stürze bei den Proben nicht schwer gewesen seien. Für das Image der Sendung als Familienshow sei es richtig gewesen, dass Thomas Gottschalk die Sendung nach dem Unfall abgebrochen habe, sagte der Programmdirektor dem Norddeutschen Rundfunk (NDR). Die Unterhaltung sei nicht über das tragische Unglück gestellt worden. Auf die Frage, ob die Sendung risikoreicher geworden sei, da sie neben der RTL-Show „Das Supertalent“ bestehen müsse, sagte Bellut, dies sei nicht der Fall. Der Quotendruck habe keine Rolle gespielt, Konkurrenz gebe es immer.

Jugend-Pop-Star Justin Bieber bittet um Gebete für Samuel Koch

Bereits am Samstagabend hat der Jugend-Pop-Star-Sänger, Justin Bieber (16) über den Kurznachrichtendienst Twitter die internationale Öffentlichkeit gebeten, für den verunglückten Schauspiel-Studenten und Geräte-Turner Samuel Koch (23) für dessen Heilung und Genesung zu beten. Der Bitte und dem Aufruf des jungen Pop-Sängers aus Kanada folgten zahlreiche Menschen in Deutschland und in der Welt. Mehrere Tausend Menschen in Deutschland und in der Welt beten weiterhin für den jungen Schauspiel-Studenten und dessen Familie aus Baden-Württemberg.

Die Seite von Justin Bieber bei Twitter ist bei http://twitter.com/justinbieber erreichbar.

XXL-info. Compact – Nachrichten bei Radio TV IBS Liberty (empfangbar bei www.ibstelevision.org und www.youtube.com/andreasklamm). [youtube=http://www.youtube.com/watch?v=1ISBJ3xAjPk&fs=1&hl=en_US]
Der Fernseh-Nachrichten-Beitrag ist auch direkt bei http://www.youtube.com/watch?v=1ISBJ3xAjPk abrufbar.

Hilft der Hinweis einer Kriminalhauptkommissarin den vermissten Großvater zu finden ?

Hilft der Hinweis einer Kriminalhauptkommissarin den vermissten Großvater zu finden ?

Der französische Offizier Hedi Sabaot wird seit 1945 vermisst – Letzter bekannter Aufenthaltsort ist Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz

Mainz / Kaiserslautern. 16. November 2010. Möglicherweise ist es der Hinweis einer Kriminalhauptkommissarin, der helfenkann den Familienangehörigen, den Kindern und den Enkeln-Kindern, ihren seit 1945 vermissten französischen Großvater und Vater Hedi Sabaot zu finden.

Hedi Sabaot war als Offizier der französischen Armee im Jahr 1945 in Kaiserslautern stationiert. Seine damalige Geliebte, die deutsche Frau, Marta Maier und der französische Offizier Hedi Sabaot waren damals bei den französischen und deutschen Behörden und wollten eine Erlaubnis zum Heiraten. Die Situation des Liebespaares im Jahr 1945 ist bei den deutschen und französischen Behörden Aktenkundig, wie es im Amtsdeutsch heißt. Eine Erlaubnis zur Heirat zwischen deutschen Frauen und Offizieren der Besatzungs-Armeen war im Jahr 1945, nur wenige Monate nach dem Ende des zweiten Weltkrieges nicht einfach und es bestanden auch hohe Risiken. Die Deutschen waren nur wenige Monate nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges am 8. Mai 1945 in aller Welt gehaßt. Wenn sich Besatzungs-Soldaten und die Offiziere der Besatzungsarmeen aus Frankreich, Groß Britannien, den Vereinigten Staaten von Amerika und aus Rußland in deutsche Frauen verliebten, war dies immer mit Problemen verbunden.

Obgleich das Liebes-Paar noch zuvor bei den deutschen und französischen Behörden war, um eine Erlaubnis zum Heiraten zu erhalten, verliert sich jede Spur des ehemaligen Offiziers Hedi Sabaot in der Stadt Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz.

Andreas Klamm-Sabaot, der Enkel-Sohn, des französischen Staatsbürgers und französischen Offiziers Hedi Sabaot sucht seinen vermissten Großvater seit mehr als 25 Jahren. Die Suche begann dieser im Jahr 1984 als er gerade einmal 16 Jahre jung war. Zuerst musste er damals seine Großmutter Marta Kolacz finden, die inzwischen den Stiefgroßvater Joseph Kolacz, einen ehemaligen Militär-Polizisten der Polisch Devision der U.S. Armed Forces Europe, das meint der Polnischen Division der U.S. Streitkräfte in Europa heiratete, nach dem diese 1950 für immer Deutschland verlassen hatte und nach Melbourne in den State of Victoria nach Australien ausgewanderte. Im Jahr 1987 konnte Andreas Klamm-Sabaot, Dank der Behörden in Melbourne in Australien, seine Großmutter Marta Kolacz finden, die im Jahr 1950 Kaiserslautern für immer verlassen musste. Marta Kolacz ist im öffentlichen nationalen Archiv von Australien als displaced people, das meint als vertriebene Person, registriert.

Doch leider wußte auch die Großmutter Marta Kolacz nicht, was mit ihrem früheren Geliebten, dem französischen Offizier und französischen Staatsbürger Hedi Sabaot geschehen ist. Die französischen Behörden hätten sie darüber informiert, dass Hedi Sabaot nach Tunesien versetzt wurde. Doch ein Mitarbeiter der Botschaft in Tunesien bestätigte auf Anfrage, dass die Ankunft von Hedi Sabaot in Tunesien nicht registriert werden konnte. So verliert sich die Spur des französischen Armee-Offiziers Hedi Sabaot in Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz.

Vor rund drei Jahren wurde Andreas Klamm-Sabaot in einem öffentlichen Archiv fündig. In den 50er Jahren wurden zwei französische Offiziere in der Nähe von Kaiserslautern ermordet. Vor wenigen Wochen kam ein möglicherweise entscheidender Hinweis einer Kriminalhauptkommissarin.

Der Tipp der Kriminalhauptkommissarin: Andreas Klamm-Sabaot soll die Polizei und Behörden in Kaiserslautern bitten eine DNA-Analyse zwischen den ermordeten französischen Offizieren in der Nähe von Kaiserslautern und ihm als Nachkommen durchführen zu lassen. Mittels neuester Technik könnte es möglich sein, auch 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges eine möglicherweise bestehende Blutsverwandtschaft zwischen einem der ermordeten französischen Offiziere in der Nähe von Kaiserslautern und dem Enkel-Sohn Andreas Klamm-Sabaot mittels DNA-Analyse und weiterer Techniken nachzuweisen.

Der Hinweis der Kriminalhauptkommissarin schenkt der Familie und dem Enkel-Sohn eine große Hoffnung, zumindest Fotos und Informationen über den Verbleib des seit 1945 vermisssten französischen Offiziers und französischen Staatsbürgers, Hedi Sabaot, zu erhalten, auch dann wenn sich der traurige Verdacht bestätigen sollte, dass dieser in Deutschland nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges möglicherweise in der Nähe von Kaiserslautern ermordet worden sein könnte. Zumindest wäre es dann möglich Fotos und Informationen zum geliebten und vermissten Großvater Hedi Sabaot zu erhalten, nach einer Suche, die schon mehr als 25 Jahre andauert. Daher hat der tunesisch-französisch-deutsche Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Buch-Autor von neun verfassten und veröffentlichten Büchern, Herausgeber und Verleger, Andreas Klamm – Sabaot am 16. November 2010 auch eine öffentliche Petition an den Innenminister des Landes Rheinland-Pfalz, Karl Peter Bruch, gesendet mit der Bitte bei der Suche nach dem vermissten französischen Staatsbürger und ehemaligen Offizier der französischen Armee, Hedi Sabaot, zu helfen. Es wäre ein wahrer Dienst für den Frieden, 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges. Ob Innenminister Karl Peter Bruch, der auch für die Polizei in Rheinland-Pfalz und Kaiserslautern zuständig ist, die Hilfe bei der Suche nach dem vermissten französischen Offizier und französischen Staatsbürger Hedi Sabaot, unterstützen wird, bleibt abzuwarten.

PRESSE-Kontakt / Kontakt für die Medien:

Andreas Klamm – Sabaot

French-German Journalist, Broadcast journalist, author, nurse (R.N.), paramedic, director, missionary and news correspondent

Französisch-deutscher Journalist, staatl. geprft.Gesundheits- und Krankenpfleger, Rettungssanitäter, Missions-Leitung, Missionar, Nachrichten-Korrespondent

c/o Schillerstr. 31, D 67141 Neuhofen, Deutschland, Germany)
c/o 160 Greenford Road, Sudbury Hill – London, HA13QS, United Kingdom, Groß Britannien / Vereinigtes Königreich
Tel. 0049 6236 416 802, Tel. 0049 62 36 48 90 44, Fax.001 503 212 6883 (U.S.A.), email: andreasklamm@hotmail.com

An

Herrn
Karl Peter Bruch
Innenminister Rheinland-Pfalz
Minister des Innern und für Sport

Schillerplatz 3 – 5
55116 Mainz

Telefon: 06131 – 16 0
Telefax: 06131 – 16 35 95
E-Mail: poststelle@ism.rlp.de

Petition und Offener Brief zur Situation tri-nationaler und bi-nationaler Bürger und Bürgerinnen in Rheinland-Pfalz und in Deutschland / französisch-deutsche und deutsch-französische Bürger sogenannte « Mischlings-Kinder »

Petition und ANTRAG zur Unterstützung bei der SUCHE seit 1984 nach meinem Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger, geboren in Tunis, Tunesien, Nord-Afrika, im Jahr 1945 stationiert als französischer Offizier in Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz – seither VERMISST !

Sehr geehrter Herr Innenminister Karl Peter Bruch !

Wie Ihnen bekannt ist im Jahr 2010 der 65. Jahrestag der Kapitulation und für den Frieden in Deutschland am 8. Mai 1945. An Ministerpräsident Kurt Beck habe ich zwecks Unterstützung eine öffentliche Petition gesendet.

In der Angelegenheit der Suche nach meinem Großvater, HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und ehemaliger FRANZÖSISCHER OFFIZIER, geboren in Tunis, Tunesien in Nord-Afrika, stationiert 1945 in Kaiserslautern in in Rheinland-Pfalz sende ich Ihnen heute nach einem Gespräch mit einer Kriminalhauptkommissarin, deren Namen ich aus dienstlichen Gründen als Journalist, Rundfunk-Journalist, Nachrichten-Korrespondent, Verleger und Herausgeber seit 1984, in dieser Petition nicht öffentlich machen kann, einen ANTRAG und eine öffentliche Petition mit der BITTE bei der Suche nach meinem seit 1945 vermissten Großvater, dem französischen Staatsbürger und ehemaligen Offizier der französischen Armee, HEDI SABAOT, zu helfen.

Im Jahr 1984 habe ich als damals 16jähriger Jugendlicher die internationale Suche nach meinen beiden vermissten Großeltern begonnen. Die Informationen wurden mir hierzu von meinem Vater, Manfred Klamm, ehemaliger Feuerwehr-Obermann der Stadt Ludwigshafen am Rhein, Berufsfeuerwehr Ludwigshafen am Rhein und ehemaliger Postbeamter, verstorben am 4. Februar 2000, nach einem schweren Unfall aus unbekannten Gründen NICHT vor dessen Tod mitgeteilt.

Daher machte ich mich weltweit alleine auf die Suche nach meinen Großeltern der mütterlichen Seite, konkret auch auf die Suche nach den Eltern meiner Mutter und meinen Großeltern und die meiner beiden Schwestern. Die Großeltern der väterlichen Seite aus Deutschland kannte ich gut. Nach dreijähriger Suche von 1984 bis 1987 konnte ich meine Großmutter MARTA KOLACZ, geborene Maier, am 11. September 1922 in Erfenbach bei Kaiserslautern, DANK der freundlichen Unterstützung der BEHÖRDEN in Australien in der Stadt Melbourne im State of Victoria finden (Beweis: Schreiben der Behörden in Australien).

In einem Schreiben aus dem Jahr 1963 an meine Eltern, kurz vor deren Hochzeit, damals lebte ich noch nicht, teilte meine Großmutter MARTA MAIER, die in Melbourne in Australien offiziell in den Archiven als displaced people, in deutscher Sprache als vertriebene Person registriert ist, mit, dass diese glaubt, dass der vermisste französische Offizier und Staatsbürger HEDI SABAOT nach Tunesien nach 1945 zurück versetzt wurde.

Im Jahr 1945 waren meine Großmutter Marta MAIER und mein Großvater Hedi SABAOT bei den deutschen und bei den französischen Behörden die damals für KAISERSLAUTERN in Rheinland-Pfalz zuständig waren, weil diese heiraten wollten. Meine Großmutter Marta Maier war bereits im Oktober 1945, das bedeutet also nur vier Monate nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges SCHWANGER. Meine Großeltern liebten sich sehr und wollten heiraten. Aus nicht bekannten Gründen wurden von den deutschen Behörden und von den französischen Behörden die Erlaubnis zur HEIRAT leider nicht erteilt.

In einem Gespräch mit einem Mitarbeiter der Botschaft von TUNESIEN wurde mir mitgeteilt, dass eine Einreise meines Großvaters HEDI SABAOT, in Tunesien bei den Behörden in Tunesien NICHT registriert ist. Der Mitarbeiter hat mir empfohlen mit den Behörden in Deutschland und Frankreich zwecks der Informationen über den Verbleib meines seit 1945 vermissten Großvaters HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und ehemaliger französischer Offizier, aufzunehmen.

Leider werden den suchenden Angehörigen, das meint den Kindern und den Enkel-Kindern der vermissten Verwandten immer noch wichtige Informationen mit der Begründung militärischer oder polizeilicher Geheimnisse vorenthalten. Doch 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges glaube ich, ist das RECHT AUF INFORMATION der Angehörigen vermisster Familien-Angehörigen der französischen Armee oder auch der deutschen Wehrmacht sicher und weit wichtiger zu bewerten, da die Offiziere und Soldaten der französischen Armee und der deutschen Armee, schon aufgrund des sehr hohen Alters, so die Angehörigen noch leben sollten, NICHT mehr im Dienst der deutschen Wehrmacht bzw. Bundeswehr bzw. der französischen Armee stehen können.

Daher bitte ich Sie in dieser Petition und in diesem Antrag die SUCHE nach vermissten französischen Offizieren und auch nach vermissten deutschen Offizieren zu unterstützen. In meinen Recherchen seit 25 Jahren als Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Buch-Autor von 9 veröffentlichten Büchern, Verleger und Herausgeber von British Newsflash Magazine seit 1986, Stadtmagazin Ludwigshafen am Rhein, Vorderpfalz aktuell, Radio- und Fernseh-Magazin seit 1984 und zahlreicher weiterer Medien, konnte ich feststellen, dass ich KEIN Einzelfall bin, was ich früher als Jugendlicher im Jahr 1984 noch vermutete hatte. Es gibt in Deutschland mehrere Tausend MENSCHEN, die ihre französischen oder auch deutschen Verwandten bzw. Verwandten in der DIREKTEN FOLGE des ZWEITEN WELTKRIEGES seit mehreren Jahrzehnten, wie auch ich suchen !

In den öffentlichen Archiven bin ich auf besondere Ereignisse aufmerksam geworden. In den 50er Jahren wurden in der Nähe von KAISERSLAUTERN zwei Offiziere der französischen Armee aus mir bislang noch nicht bekannten Hintergründen ermordet.

In einem Gespräch teilte mir eine Kriminalhauptkommissarin mit, dass es sehr wahrscheinlich ist, dass die zuständige Polizei und die Behörden in Kaiserslautern vermutlich noch über DNA-Materialen aus dem Mord-Fall an zwei französischen Offizieren in Kaiserslautern verfügen. Da mir der Mitarbeiter der Botschaft in Tunesien mitteilte, dass eine Einreise meines Großvaters nach Tunesien nicht registriert ist und mein Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und französischer Offizier, umgangssprachlich formuliert, wie vom Erdboden verschluckt erscheint, obgleich mir mitgeteilt wurde, dass alle Offiziere und Soldaten auch der französischen Armee und der deutschen Wehrmacht bereits lange vor 1945, also vor dem Ende des Zweiten Weltkrieges gründlich registriert und in Archiven erfasst wurden, kann ich in der logischen Schlussfolgerung einen Zusammenhang zu den zwei ermordeten französischen Offizieren in der Nähe von Kaiserslautern nicht mehr eindeutig ausschließen.

Ein weiterer Hinweis ergibt sich aus dem Schreiben meiner Großmutter aus dem Jahr 1963. FRAGE: Weshalb sollten meine Großmutter Marta Maier und mein Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und Offizier, erst bei den deutschen und französischen Behörden um eine Erlaubnis zur Heirat bitten und ausgerechnet im Jahr 1946 als meine Mutter geboren wurde, mein Großvater HEDI SABAOT dann kein Lebenszeichen mehr von sich geben. In der logischen Schlussfolgerung legt dies sogar sehr nahe, dass mein Großvater HEDI SABAOT aus mir heute immer noch nicht bekannten Gründen NICHT mehr in der LAGE war ein Lebenszeichen von sich zu geben und sich um seine Ehefrau, das meint meine Großmutter Marta MAIER (später ein zweites Mal verheiratet, daher der NAME KOLACZ) und seine Tochter, das meint meine Mutter NICHT kümmern (Beweis: Meine Großeltern, HEDI SABAOT und meine Großmutter Marta Maier waren bei den deutschen und französischen Behörden, KOPIE des Briefes meiner Großmutter Marta Maier aus 1963 ! und wollten heiraten) .

Diese Zusammenhänge legen nahe, dass meinem Großvater HEDI SABAOT etwas zugestoßen sein könnte. Die Kriminalhauptkommissarin teilte mir mit, dass es DANK der technischen Fortschritte in Deutschland mittels einer DNA-Analyse heute möglich ist, zu prüfen, ob einer der beiden ermordeten französischen Offiziere, die in der Nähe von Kaiserslautern ermordet wurden, möglicherweise mit mir verwandt sein könnte. Sollte sich dies bestätigen, so könnte ich zumindest die Informationen zu meinem seit 1945 vermissten Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und ehemaliger französischer Offizier erhalten.

Daher bitte ich zu prüfen, ob Sie die Suche nach meinem seit 1945 vermissten Großvater mittels einer DNA-Analyse und mittels der FREIGABE aller Informationen zu den in der Nähe von Kaiserslautern ermordeten französischen Offiziere mitteilen können. In den öffentlichen Archiven, wird nur darüber informiert, dass in der Nähe von Kaiserslautern, zwei französische Offiziere ermordet wurden. Die Namen der Offiziere werden in den öffentlichen Archiven leider nicht genannt.

Mein Großvater HEDI SABAOT ist kein Militär-Geheimnis mehr und ich bitte Sie zu respektieren, insbesondere auch deshalb weil ich KEIN Einzelfall bin, sondern die Probleme dieser Art zahlreiche weitere Menschen betrifft, zu handeln und sich dafür einzusetzen, dass die Kinder und Enkel-Kinder FREIEN ZUGANG zu den Informationen erhalten, was mit den Angehörigen, seien es Eltern, Väter, Mütter, Großmütter und Großväter geschehen ist, erhalten dürfen.

Der Suchdienst des Deutschen Roten Kreuzes, den ich in die Suche bereits eingeschaltet hatte, sucht nach einer Selbstauskunft nur nach vermissten deutschen Soldaten, doch leider nicht nach vermissten FRANÖSISCHEN SOLDATEN.

Werter Herr Innenminister Karl Peter Bruch, als Innenminister sind Sie auch zuständig für die POLIZEI in Rheinland-Pfalz und in KAISERSLAUTERN. Daher bitte ich die Suche nach meinem seit 1945 vermissten Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und ehemaliger französischer Offizier zu unterstützen und zu helfen wenigstens Fotos und Informationen über den Verbleib meines Großvaters zu erhalten.

Meine Großmutter Marta Maier musste 1950 Deutschland für immer verlassen. Sie wanderte nach Melbourne in Australien aus und heiratete dort den ehemaligen SECURITY POLICE OFFICER, das meint früheren Militär-Polizisten, der Polnischen Division der U.S. ARMED FORCES EUROPE, JOSEPH KOLACZ aus Polen (in deutscher Sprache der U.S. Streitkräfte für Europa).

Über meinen Stief-Großvater JOSEPH KOLACZ habe ich weit mehr Informationen und sogar Fotos; siehe hier den BEWEIS – Fotos meines Stiefgroßvaters JOSEPH KOLACZ, ehemaliger Militär-Polizist für die U.S. Streitkräfte der Polnischen Division in Europa als über meinen direkten Blutsverwandten und meinen LEIBLICHEN Großvater HEDI SABAOT, französischer Staatsbürger und Offizier.

Die Fotos zeigen meinen Stiefgroßvater Joseph Kolacz. Durch die Heirat in Australien hat sich der Nachname meiner Großmutter Marta Maier in Marta Kolacz geändert. Meine Großmutter Marta Kolacz und mein Stiefgroßvater Joseph Kolacz sind beide leider bereits verstorben und in Australien beerdigt.

Als Innenminister des Landes Rheinland-Pfalz, doch auch jeder Polizist des Landes und auch ich als tunesisch-französisch-deutscher Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Buch-Autor, Schriftsteller, Herausgeber und Verleger weiß, Offiziere der deutschen Wehrmacht und auch die Offiziere der französischen Armee, wie mein Großvater HEDI SABAOT, verschwinden nicht einfach so in Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz im Jahr 1945 nach dem ENDE des ZWEITEN WELTKRIEGES ohne eine einzige Spur zu hinterlassen.

Sie als Innenminister, jeder Polizist in Deutschland und auch ich, ja sogar jeder Offizier der französischen Armee oder der heutigen deutschen Bundeswehr wissen sehr gut, dass es immer einen Hinweis oder eine Spur speziell auf Offiziere gibt, da die Armeen aller Ländern für ihre genaue Registrierung von Soldaten und Offizieren bekannt sind.

Daher glaube ich sehr wohl, dass sich auch 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges die Hinweise auf meinen seit 1945 vermissten französischen Großvater HEDI SABAOT und ehemaligen Offizier der französischen Armee finden lassen mit etwas Unterstützung vielleicht direkt von Ihnen, werter Herr Innenminister Karl Peter Bruch oder auch der Polizei in Kaiserslautern und in Rheinland-Pfalz.

Sollte einer der beiden in der Nähe von Kaiserslautern ermordeten französischen Offiziere vielleicht tatsächlich mein Großvater sein, ist es vermutlich sogar auch für Kriminal-Historiker interessant eine DNA-Analyse und die Informations-Freigabe zu den Ereignissen in Kaiserslautern in den 50er Jahren freizugeben und den lebenden Kindern und Enkeln-Kindern, das sind meine beide Schwestern und ich, direkt betroffen, zumindest die Fotos und Informationen über den Verbleib des Vater und Großvaters HEDI SABAOT kostenfrei zur Verfügung zu stellen.

Mit dieser Petition und dem Antrag bitte ich um Ihre freundliche Unterstützung.

Die Abschrift eines Teils eines Briefes meiner Großmutter Marta Kolacz, geborene Maier, am 11. September 1922 in Erfenbach bei Kaiserslautern in Rheinland-Pfalz an meine Eltern im Jahr 1963, kurz vor deren Hochzeit erhalten Sie im Auszug in der Anlage zwecks Ihrer geschätzten Prüfung. Mir liegt auch das Original des Briefes vor, so dass das Schreiben meiner Großmutter Marta Kolacz aus dem Jahr 1963 aus Australien MEHRFACH auf seine Echtheit Dank moderner technischer Mittel, die es heute gibt, sogar auf Herkunft und Alter untersucht werden kann, wie mir weitere Polizei-Kommissare mitteilten. Immerhin 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges, gibt es für mich als afrikanisch-europäischen Bürger und Journalist und als tunesisch-französisch-deutscher Bürger und Journalist sicherlich keinen Grund mehr, die Identität meines Großvaters HEDI SABAOT, der als französischer Offizer auch Frankreich, Deutschland und Europa im Dienst für den Frieden geholfen hat, zu leugnen. Rheinland-Pfalz ist ja ein Welt-offenes Land und Angehörige tri- und bi-nationaler Herkunft müssen ihre Herkunft und Urzwurzeln in verschiedenen Ländern sicher mehr nicht verleugnen.

Gibt es einen Grund, weshalb meine Identität, als bi-nationaler oder tri-nationaler Bürger, Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Verleger, Herausgeber, Moderator und Autor von 9 veröffentlichten Büchern verleugnet werden sollte aufgrund meiner afrikanisch-euorpäischen Herkunft ? Wohl kaum, da ich nicht vermute, dass Sie als Innenminister des Landes Rheinland-Pfalz oder die SPD als Partei, rassistische oder gar Ideologien der NSDAP NICHT gut heißen können oder unterstützen. Laut Präambel im Grundgesetz für die Bundesrepublik Deutschland ist Deutschland und damit Rheinland-Pfalz zum DIENST für den FRIEDEN in dieser Welt verpflichtet und umso mehr bitte ich Sie heute auch in Ihrer Eigenschaft als Innenminister des Landes Rheinland-Pfalz zu helfen und beizutragen, dass nach den Schrecken des Zweiten Weltkrieges, der so viel Unheil über die Menschen in Deutschland und Europa brachte, einen FRIEDENS-DIENST zu leisten, und auch den MENSCHEN ZU HELFEN, die seit mehreren Jahrzehnten nach vermissten Groß-Eltern, Groß-Mütter, Groß-Väter, Mütter und Väter suchen. Familien-Angehörige, seien es Groß-Eltern oder Eltern, die in der Folge des Zweiten Weltkrieges seit 1945 vermisst werden, dürfen 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges nicht mehr als Militär-Geheimnisse behandelt werden.

Als tunesisch-französisch-deutscher Bürger, Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Buch-Autor, Moderator, Radio- und Fernseh-Produzent, Verleger und Herausgeber seit 1984 – seit mehr als 25 Jahren – der sich seit 1986 für internationale Völkerverständigung in der Arbeit in den Medien engagiert, habe ich auch im Dienst als wehrpflichtiger Soldat für 15 Monate bei der Luftwaffe der Bundeswehr in den Jahren 1988 bis 1989, im öffentlichen Dienst in der Arbeit für Presse und Medien seit 1984, im öffentlichen Dienst auch als staatlich geprüfter Gesundheits- und Krankenpfleger (ehemals tätig für zwei Universtitäts-Kliniken zweier Bundesländer und für kommunale Krankenhäuser in Trägerschaft von Landkreisen und Städten in Deutschland) auch wichtige Dienste nicht nur für Deutschland sondern auch für Frankreich, Groß Britannien und für Menschen aus einer Vielzahl weiterer Ländern nachweisbar geleistet. – Schon daher glaube ich, dass es nicht einen einzigen Grund dafür gibt, die Geschichte meines tunesisch-französischen Großvaters HEDI SABAOT, der Frankreich und in Deutschland im Jahr 1945 als französischer Offizier diente und meine eigene Geschichte und Identität und Urwurzeln zu verleugnen oder gar totzuschweigen und dies trifft sicher auch auf eine beträchtliche Anzahl weiterer Menschen zu, die in Rheinland-Pfalz umgangsprachlich noch heute als sogenannte “Mischlings-Kinder” bezeichnet werden.

Daher, werter Herr Innenminister Karl Peter Bruch, bitte ich Sie ausdrücklich, den Menschen zu helfen, die 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges immer noch nach Ihren Angehörigen suchen und dazu beizutragen, dass die Informationen zu den vermissten Angehörigen des Militärs und der Verwandten in Deutschland, Frankreich, Tunesien und darüber hinaus auch in anderen Ländern im Rahmen eines DIENSTES für den Frieden für die suchenden Angehörigen freigegeben werden.

Das RECHT auf Information für die Angehörigen, Kinder und Enkel-Kinder, die ein berechtigtes Interesse haben, zu erfahren, was mit den vermissten Angehörigen, seien es deutsche oder französische Offiziere, geschehen ist, ist meiner Überzeugung nach höher zu bewerten, als die Wahrung sogenannter, militärischer Geheimnisse, 65 Jahre nach dem Ende des Zweiten Weltkrieges.
Daher bitte ich Sie heute freundlichst um Prüfung und um Ihre werte Unterstützung und Hilfeleistung. In der Anlage erhalten Sie noch Informationen zu den von mir 9 geschriebenen und veröffentlichten Büchern. Es würde mich sehr freuen, wenn Sie vielleicht bei etwas Zeit und Ruhe das ein oder andere Buch von mir lesen können.

Vielen Dank im voraus.

Mit freundlichem Gruß

Andreas Klamm – Sabaot

Französisch-(tunesisch)-deutscher Journalist, Rundfunk-Journalist, Autor, Radio- und Fernseh-Produzent, staatlich gerpft. Gesundheits- und Krankenpfleger, Rettungssanitäter, Missionar und Missions-Leitung

Verleger und Herausgeber von Stadtmagazin Ludwigshafen / Vorderpfalz aktuell / 3mnews.org / RPF Rundfunk- und Programmarbeitsgemeinschaft für Film, Funk und Fernsehen seit 1984

Verleger und Herausgeber von British Newsflash Magazine, Radio TV IBS Liberty, IBS Independent Broadcasting Service Liberty seit 1986
French-German Journalist, broadcast journalist, author, nurse (R.N.), director, missionary and news-correspondent, publisher
www.andreasklamm.de.be
www.andreas-klamm.de.be
http://andreasklamm.radiotvinfo.org
www.andreasklamm.blogspot.com
Andreas Klamm, Journalist, staatlich geprüfter Gesundheits- und Krankenpfleger, Steuernummer: Umsatz-Steuer-Ident-No. DE 258678726, (Tax ID number), Finanzamt Ludwigshafen am Rhein, Rheinland-Pfalz, Deutschland (Germany)

Der offene Brief und die Peition an Innenminister Karl Peter Bruch in Rheinland-Pfalz kann auch bei MJB Mission News, ISSN 1999-8414, in der Original-Fassung und Gestaltung gelesen werden: http://www.scribd.com/doc/42771288/Petition-Innenminister-Rheinland-Pfalz-Bi-Nationale-Menschen